प्रशांत दयाल (मेरान्यूज, अहमदाबाद, गुजरात): 

शंकरसिंह बापू, 
वैसे तो आप की छबी दबंग नेता के जैसी है, पर आप जैसे दीखते हो वैसे हो नहीं. आप सफ़ेद जूठ बोल में माहिर है. 6 महीने पहले जब मैंने मेरान्यूज में रिपोर्ट लिखा था की शंकरसिंह वाघेला मुंबई में शरद पवार और एनसीपी के नेताओ से मीटिंग कर रहे है और वो एनसीपी में जुड़ शकते है. तब शंकरसिंह आपने पत्र लिखकर इस रिपोर्ट को गलत बताया था. यहां तक की आपने न्यूज चेनल्स में इंटरव्यू देकर कहा था की ये सब मीडिया के दिमाग की उपज है, ये रिपोर्ट जूठी है. लेकिन आज सच सामने आ गया है शंकरसिंह, कौन सच्चा और कौन जूठा है वो जनता के सामने है. 

गुजरात और देश की आमजनता ये सोच रही है की आपने राजनीति में 50 साल रहने के बाद गुजरात में एनसीपी जैसी पार्टी में जुड़ने का फैसाल क्यों किया? इस का जवाब यह है की आगामी लोकसभा चुनाव में गुजरात में भाजपा के वोट काम होने की आशंका है इस लिए इसका फ़ायदा कांग्रेस को मिलानेवाला है. लेकिन अमित शाह सोचते है की अगर एनसीपी भी गुजरात के चुनावी रण में उतरे तो जो लोग भाजपा से नाराज है वो कांग्रेस की बजाय एनसीपी को वोट करेंगे, जिससे कांग्रेस को होनेवाला फ़ायदा कम हो जाए और भाजपा के उम्मीदवार जीते. इस के लिए शंकरसिंह वाघेला अमित शाह के इशारे से एनसीपी में जुड़ गए है. इस से पहले वाघेला शाह के इशारे से गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनी अलग पार्टी बनाकर मैदान में आये थे लेकिन ज्यादा कुछ हांसिल नहीं कर पाए थे. 

लोग पूछ रहे है की शंकरसिंह वाघेला कांग्रेस की सरकार में पूर्व केंद्रीय कपड़ा मंत्री रह चुके है उनको अमिता शाह की कठपुतली बनाकर क्यों नाचना पड़ रहा है? वाघेला शाह के क्यों डरते है? तो आप को बता दे की 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इशारे से सीबीआई की एक टीम शंकरसिंह वाघेला के गांधीनगर स्थित फ़ार्म हाउस 'वसंत वागडो' में सर्च के लिए आयी थी. जिसकी वहज से वाघेला बहुत डर गए थे. जब वाघेला केंद्रीय कपड़ा मंत्री थे तब एनटीसी मिल्स की बीक्री के मामले में कुछ गड़बड़ी की गई थी की नहीं उसकी जांच कर ने आयी थी. शंकरसिंह को जो डर था की उनकी हालत भी कही बिहार के लालू प्रसाद यादव के जैसी न हो जाए और उनको जेल जाना न पड जाए. जिसकी वहज से वाघेला शाह और मोदी की कठपुतली बन गए. 

शंकरसिंह वाघेला आप अपने हृदय पर हाथ रख के कही आपको अमित शाह से डर लगता है की नहीं? हालांकि डर तो हर किसी को लगता है, लेकिन डर की वजह अलग-अलग होती है. जैसे की आम आदमी को अपनी नौकरी बचाने और घर चलाने का डर, रोड की साइड में ठेला चलानेवाले को पुलिस का डर, नरेंद्र मोदी को आगामी चुनाव में कही अपनी सरकार न हार जाए उसका डर. वैसे ही स्कैम करनेवालो को सीबीआई का डर रहता है. नरेंद्र मोदी और और अमित शाह अपने विरोधीओ का पूरा ध्यान रखते है, उनकी डिक्शनरी में माफी नाम का शब्द भी नहीं है. शंकरसिंह आप मोदी और शाह को नुकशान पहुंचा सकते थे इस लिए उन्होंने आप को सीबीआई के नाम से डरा दिया और आप डर भी गए. कई बार मजबूरी में भी हमें समाधान करना पड़ता है. आपको पसंद ना हो फिर भी आपको एनसीपी में जुड़ के कांग्रेस को नुकशान पहुंचाना पडेगा. खैर जीवन में ऐसा चलता रहता है. शंकरसिंह आप भी तो कहते है ना की राजनीति में कोइ हमेशा दोस्त या दुश्मन नहीं होता. नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी चाहते है की आप खुले मंच से उनके खिलाफ बोले ताकि कांग्रेस को होनेवाला फ़ायदा एनसीपी की तरफ चला जाए. 

खैर अब शंकरसिंह जब आप डरे हुए है तो और कुछ हो भी नहीं सकता. अब आप नियती के सहारे हो ऐसा कहकर सबकुछ निभाते चले. 

-जिसको आप पसंद नहीं करते ऐसा..... प्रशांत दयाल