मेरान्यूज नेटवर्क, राजकोट : पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के अल्पेश कथीरिया पिछले काफी समय से राजद्रोह के केसमें जैल में बंद है। उसको जैलसे छुड़ाने के लिए पाटीदार समुदाय सामने आया है। जिसके तहत आज पाटीदार युवको द्वारा राजकोट कलेक्टर को आवेदन सुपरत किया गया। साथ ही कोंग्रेस नेता हार्दिक पटेल और खोड़लधाम प्रमुख नरेश पटेल की मौजूदगी में एक समुदाय की एक बैठक मिली। जिसमे एक कमिटी बनाकर अल्पेश की मुक्ति के लिए सरकार से बात करने का निर्णय लिया गया।

सरकार ने केस वापिस लेने का वादा नहीं निभाया : हार्दिक पटेल

हार्दिक पटेल के मुताबिक, विधानसभा चुनावों से पहले सरकारने पाटीदार युवको पर केस दर्ज किए। समुदाय के साथ हुई बैठक में सरकार ने तमाम केस वापिस लेने की बात कही थी। हालांकि सरकार ने अपने वचन का पालन नहीं किया है। आज भी पाटीदार समुदाय के कई युवक राजद्रोह की सजा भुगत रहे है। खुद मेरे ऊपर भी 28 केस दर्ज किए जा चुके है। युवाओं को इस प्रकार जैल में भेजकर सरकार उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। हालांकि नरेश पटेल पाटीदार समुदाय के अग्रणी है। और उन्होंने समुदाय के युवाओं को बाहर निकालने का बीड़ा उठाया है। और मुझे आशा है कि जल्द ही अल्पेश समेत समुदाय के लोगो पर किए गए केस वापिस ले लिए जाएंगे।

6 सदस्यों की कमिटी बनाकर सरकार से चर्चा करेंगे : नरेश पटेल

बकौल नरेश पटेल अल्पेश को जैल से बाहर निकालने के साथ समुदाय के युवको पर किए गए केस वापिस खींचने के उदेश से पाटीदारो की इस मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसमें लिए गए निर्णय के मुताबिक खोडलधाम, उमियाधाम और पास के 2-2 सदस्यों को मिलाकर एक कमिटी बनाकर सरकार से इस बारेमें चर्चा की जाएगी। हालांकि वैसे तो यह कोर्ट मेटर है, लेकिन सरकार इसमे किस प्रकार से मददगार होगी यह तो सरकार से चर्चा के बाद ही सामने आएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर किसी भी प्रकार की मदद करने के लिए तैयार होने की बात भी उन्होंने बताई थी। और अगले सप्ताह तक कमिटी का गठन कर इस मामले में सरकार से बातचीत करने की संभावना उन्होंने व्यक्त की है।

10 प्रतिशत अनामत मिल जाने के कारण आंदोलन का कोई मतलब नहीं

इस मौके पर हार्दिक और नरेश पटेल ने खास बताया कि, अनामत के लिए आंदोलन किया गया था। और सरकार द्वारा 10 प्रतिशत अनामत दे दी गई होने की वजह से आंदोलन का कोई मतलब नही है। साथ ही हार्दिक ने कहा कि, बिना कारण आंदोलन चलाकर राजनीति करना हमारी फितरत में नही है। हालांकि आंदोलन के दौरान शहीद हुए युवको के परिजनों को नौकरी और समुदाय पर किए गए तमाम केस वापिस लेना जरूरी होने का आग्रह भी किया गया है।