प्रशांत दयाल (मेरान्यूज, अहमदाबाद, गुजरात): दुबई से लेकर गुजरात और महाराष्ट्र के उद्योगपतिओं करोडो रुपयों की फिरौती मांगनेवागे अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी को केंद्र सरकार की सुरक्षा एजेंसी के आफ्रिका से गिरफ्तार कर लिया है. डॉन रवि पुजारी को पकड़वाने में गुजरात कैडर के आईपीएस हिमांशु शुक्ला का बड़ा हाथ रहा. उन्होंने ही सेन्ट्रल एजेंसी को इनपुट दिए थे की रवि पुजारी आफ्रिका में कहा पर रुका है. साल 2017 आईपीएस हिमांशु शुक्ला को देश की प्रमुख जासूसी एजेंसी रॉ में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का फैसला किया गया था लेकिन गुजरात सरकार के उन्हें अपनी ड्यूटी से मुक्त न करने कारण हाल में वो गुजरात एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) में डीआईजी की पोस्ट पर कार्यरत है.

2005 में यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद हिमांशु शुक्ला की पहली पोस्टिंग बनासकांठा में हुई थी. जिसके बाद बड़ौदा में ASP बनाये गए. इस दौरान उन्हें सूचना मिली थी की बड़ौदा का एक गैंगस्टर उत्तर प्रदेश में छिपा हुआ है.  नौजवान और जोशीले अफसर हिमांशु शुक्ला अपने सीनियर अफसर को जानकारी दिए बिना ही अपने साथ एक पोलीस इंस्पेक्टर और दो पुलीस कॉन्स्टेबल को लेकर उत्तरप्रदेश पहुंच गए थे. जहाँ पर गैंगस्टर के साथ भिड़ंत हुए और फायरिंग में हिमांशु शुक्ला को पेट में गोली लगी. हालांकि उनकी जान बच गयी. हिमांशु शुक्ला को इस साहस के लिए शौर्य चक्र मिलनेवाला था लेकिन वो गुजरात सरकार को बिना बताये इस ऑपरेशन को हाथ में लेने की वजह से उन्हें या सन्मान नहीं दिया गया.

हिमांशु शुक्ला खेड़ा के एसपी भी रहे. 2008  में अहमदाबाद में हुए सीरियल बम ब्लास्ट की घटना के उन्होंने क्राइम ब्रांच को केस सुलझाने में काफी मदद की थी. 2010 में हिमांशु शुक्ला को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी बनाये गए, वो पांच साल तक यह पोस्ट पर रहे. 2002 के गुजरात में दंगो के दौरान भी वो इस केस में महत्वपूर्ण भूमिका में जांच अधिकारी रहे. हाल में हिमांशु शुक्ला गुजरात  एटीएस के डीआईजी है.

रवि पुजारी को पकड़ा में आईपीएस हिमांशु शुक्ला का बड़ा हाथ होने की बाद सेन्ट्रल एजंसीने बतायी है. तब इस बारे में हिमांशु शुक्ला से संपर्क किया गया तो उन्होंने श्रेय लेने की बजाय कहा की हमारे पास जो इन्फर्मेशन आती है वो हम सेंट्रल एजेंसी से शेर करते है, हमने तो हमारा फर्ज निभाया है.